"फेसबुक पर यह फोटो लगाया था अदित भगत ने" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
Sunday, February 12, 2012
मेरे छोटे मित्र को, भाया मेरा रूप। वृद्धावस्था में कहाँ, इस चेहरे पर धूप।। सोच-समझकर ही सदा, करना हमसे प्यार। पिता तुल्य हम आपके, करना यही विचार।। खूब चलाओ लेखनी, देता हूँ अधिकार। कूँची ठण्डी राख में, भर देती अंगार।। |


10 comments:
बहुत खूब...बधाई..
बहुत बढिया!
भर देती अंगार।।
sahi kaha...
behtarin rachna...sadar badhayee
बहुत बेहतरीन....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।
NICE
बहुत बढिया!
मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ मेरा मार्ग दर्शन करे
http://rajkumarchuhan.blogspot.in
badiya prastuti..
http://pandeygambhir.blogspot.in/
हार्दिक शुभकामनाएं...
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